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“वाल्मीकि समाज में जन्म लेना गर्व की बात” ……. मकवाना । पूरी खबर पढ़े

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BBT Times। राजस्थान । राष्ट्रीय वाल्मीकि क्रान्ति कारी मोर्चा के संस्थापक अध्यक्षएवं पूर्व मन्त्री (उत्तराखण्ड सरकार )माननीय भगवत प्रसाद जी मकवाना ने सोशल मीडिया पर उदगार व्यक्त करते हुए कहा कि मुझे गर्व की अनुभूति होती है वाल्मीकि समाज में जन्म लेने पर क्योंकि गुरु महर्षि वाल्मीकि भगवान ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का संपूर्ण जीवन वृतांत एवं एक आदर्श जीवन शैली का वर्णन विश्व के अनुपम महाकाव्य रामायण में करके संपूर्ण मानवता के कल्याण का कार्य किया आधुनिक भारत में बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी ने भारतवर्ष को विश्व का महान संविधान लिखकर हमें गौरवान्वित किया वाल्मीकि समाज साहसी एवं बहादुर कौम है जिसने हिंदू संस्कृति की रक्षा हेतु अपना धर्म परिवर्तन नहीं किया जब सवा मन जनेऊ रोज औरंगजेब चलाया करता था तब भी इस बहादुर कौम ने अपना हिंदू धर्म परिवर्तित नहीं किया भले ही हिंदू समाज में रहकर उसको अनेकों यातनाएं अपमान तिरस्कार सहन करना पड़ा हो आज भी मेरी कॉम के बहादुर सफाई कर्मचारी भाई और बहन कोरोनावायरस से बचने के लिए जब देशवासी अपने-अपने घरों में हैं वही यह राष्ट्र के सच्चे सिपाही की तरह अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर गली मोहल्ले घरों कार्यालय एवं वाहनों शहरों एवं गांवों को सैनिटाइजर करने साफ सफाई करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य को अंजाम दे रहे हैं तथा सभी के जीवन को सुरक्षित बनाने में अपना योगदान दे रहे हैं मुझे हर्ष है कि आज देश के यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन जी अनेकों राज्यों के मुख्यमंत्री तथा अन्य गणमान्य लोग कोरोना वायरस महामारी से लड़ाई लड़ने वाले कर्मवीर योद्धाओं में चिकित्सकों स्वास्थ्य कर्मियों पुलिसकर्मियों मीडिया कर्मियों के साथ साथ मेरे सफाई कर्मचारी भाई बहनों का गुणगान कर रहे हैं कई शहरों में पुलिसकर्मी एवं जनता स्वच्छ कारों का स्वागत फूल माला पहनाकर कर रही है टीवी चैनलों पर दिखाया जा रहा है इसलिए मुझे गर्व है कि जिसको मैं में जन्मा हूं वह राष्ट्र की सुरक्षा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही है किंतु पीड़ा भी होती है जब आजादी के बाद अनेकों राजनीतिक दलों की सरकारें आई गई किंतु स्वच्छ कारों की दशा और दिशा में परिवर्तन नहीं कर पाई आजादी के 72 वर्षों के बाद भी सफाई कर्मचारी वर्ग की सामाजिक आर्थिक शैक्षिक एवं राजनीतिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया केंद्र से लेकर प्रदेश सरकारों अनेकों कमेटियां एवं आयोगों का भी गठन किया किंतु स्वच्छ कारों को न्याय एवं विकास नहीं मिल पाया हद तब हो गई जब दलितों की बेटी ने भी उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री बनने के बाद सफाई का काम भी वाल्मीकि समाज से छीन कर अन्य वर्गों को सफाई कर्मचारी के पद पर नियुक्त कर दिया भले ही वह सफाई का कार्य आज भी नहीं कर रहे हैं गांव के ही बेरोजगार वाल्मीकि समाज के लोगों से कम पैसे देकर अपना कार्य करवाते हैं तथा स्थाई सफाई कर्मचारी का वेतन स्वयं लेते हैं केंद्र की मनमोहन सरकार ने छठा वेतनमान लागू करते हुए चतुर्थ श्रेणी का पद समाप्त कर दिया जिसके फलस्वरूप सफाई कर्मचारियों का स्थाई रोजगार संपूर्ण देश से समाप्त हो गया फिर जेएनएनयूआरएम योजना के तहत घरों से कूड़ा उठाने का कार्य जो गरीब वाल्मीकि समाज के लोग करते थे वह अभी बड़ी बड़ी निजी कंपनियों को ठेकेदारी में दे दिया गया इस प्रकार सरकारी एवं प्राइवेट दोनों कार्य समाज से छीन ले गए और आज ठेकेदारी प्रथा पूरे देश में लागू होने से वाल्मीकि समाज का जो थोड़ा बहुत विकास हो रहा था वह पूरी तरह से रुक गया है ब्यूरोक्रेसी का भी योगदान इसमें कम नहीं है जो राजनीतिक लोगों को सलाह देते हैं कि यह लोग काम नहीं करते हैं इसलिए ठेकेदारी में कार्य कराया जाए यदि यह लोग कार्य नहीं करते हैं तो शहर की सफाई व्यवस्था है कौन करता है ब्यूरोक्रेसी एवं कुछ जनप्रतिनिधि भी ठेकेदारी में मजा ले रहे हैं क्योंकि ठेकेदारों से बड़ी-बड़ी कमीशन उनको मिलती है त्रस्त व पीड़ित है तो केवल सफाई कर्मचारी जिसको न्यूनतम मजदूरी ईपीएफ ईएसआई चिकित्सा सुविधाएं अवकाश सुविधाएं एवं अन्य सुविधाओं से ठेकेदार वंचित रख रहे हैं वर्षों वर्षों अस्थाई रूप से संविदा एवं ठेकेदारी में कार्य करने के बाद भी सफाई कर्मचारी नियमित नहीं हो पाते हैं सेवा निर्मित होने के बाद वर्षों तक पेंशन ग्रेच्युटी की सुविधाओं से वंचित रहते हैं आज भी सीवर में मेरे समाज के नौजवान नारकीय जीवन के रूप में कार्य करते हुए मृत्यु को प्राप्त हो रहे हैं हम वैज्ञानिक दृष्टि से चांद के निकट तक पहुंच गए हैं सूचना प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान के क्षेत्र में अनेकों क्षेत्रों में अनेकों उपलब्धियां देश ने प्राप्त की हैं किंतु सीवर में आज भी सफाई कर्मचारियों से ही कार्य कराया जा रहा है जबकि मैनुअल स्कैवेंजर एक्ट 2013 में इस को प्रतिबंधित किया गया है जो लोग मैनुअली कार्य कराएंगे उनके खिलाफ दंड का एवं कारावास का प्रावधान भी किया गया है लेकिन एक भी जिलाधिकारी ने आज तक किसी व्यक्ति को किसी ठेकेदार को किसी विभाग के अधिकारी को जेल नहीं कराई 1993 में सफाई कर्मचारियों की दशा सुधारने के लिए उनके हितों की रक्षा करने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री पी वी नरसिम्हा राव जी द्वारा राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग अधिनियम 1993 पारित किया गया किंतु आयोग को संवैधानिक दर्जा नहीं दिए जाने के कारण सफाई कर्मचारियों को आयोग से अपेक्षित न्याय प्राप्त नहीं हो पाया क्योंकि आयोग की सिफारिशों पर केंद्र एवं राज्य सरकारें प्रभावी अमल नहीं कर पाती जबकि अन्य आयोगों को देश एवं राज्य में वैधानिक अधिकार दिए गए हैं फिर इस आयोग को शक्तिहीन क्यों बनाया गया 1993 में शुष्क शौचालय संनिर्माण प्रतिषेध अधिनियम बनाकर शुष्क शौचालय निर्माण पर रोक लगाने का कानून बनाया गया किंतु 2011 की जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि देश में 26 लाख शुष्क शौचालय मौजूद थे 2013 में मैन्युअल स्कैवेंजर एक्ट बनाया गया जिसमें हाथ से मैला ढोने की प्रथा को समाप्त करने हेतु कड़े प्रावधान किए गए तथा स्वच्छ कारों को एकमुश्त रुपये 40 हजार अनुदान तथा 25 लाख तक के स्वरोजगार ऋण कम ब्याज दर पर दिए जाने का प्रावधान किया गया जो राशि बढ़ाकर अब राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त विकास निगम द्वारा केंद्र सरकार द्वारा 50 लाख तक कर दी गई है 2013 में कराए गए सर्वेक्षण में हाथ से मैला उठाने वाले संस्कारों की संख्या लगभग 13000 बताई गई 2014 में यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार गठित हुई इस कार्य को आगे बढ़ाते हुए सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री भारत सरकार आदरणीय डॉ थावरचंद गहलोत जी ने वर्ष 2018 में देश मैं हाथ से मैला उठाने वाले स्वच्छ कारों का पुनः सर्वेक्षण कराया जिसमें जनवरी 2020 तक लगभग 40,000 से अधिक लोगों को रु 40,000 अनुदान राशि दी जा चुकी है तथा अन्य फॉर्म पर कार्रवाई चल रही है जिसके लिए मोदी सरकार निश्चित तौर पर धन्यवाद के पात्र है साथियों प्रयागराज कुंभ में देश के यशस्वी प्रधानमंत्री जी ने स्वच्छ कारों के पैर धो करउनको सम्मानित करके एवं अपने वेतन का 21 लाख रू देकर इस वर्ग को मान सम्मान देने का कार्य किया जो इससे पहले किसी प्रधानमंत्री द्वारा नहीं किया गया था निसंदेह यह समाज के निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति को सम्मान देने का कार्य था जो सराहनीय है कोरोनावायरस महामारी से लड़ाई में सफाई कर्मचारी वर्ग का योगदान अमूल्य एवं महत्वपूर्ण है किंतु केंद्र एवं राज्य सरकार इस वर्ग के सामाजिक शैक्षिक आर्थिक एवं राजनीतिक विकास के लिए सफाई कर्मचारी समग्र विकास योजना तैयार करनी होगी तथा सफाई कार्य से ठेकेदारी प्रथा पूरी तरह से समाप्त करने की आवश्यकता है ताकि ठेकेदार ब्यूरोक्रेसी एवं जनप्रतिनिधि इस वर्ग का आर्थिक शोषण ना कर सकें सफाई जैसा कार्य करने के कारण सफाई कर्मचारी की मृत्यु दर अधिक होती है क्योंकि वह अनेकों बीमारियों से जनता को तो बचाता है किंतु स्वयं ग्रसित हो जाता है इसलिए सफाई कर्मचारियों का बीमा अधिक से अधिक किए जाने की आवश्यकता है सफाई कर्मचारियों के हितों को सुरक्षित करने के लिए बनाए गए केंद्र एवं राज्य स्तर पर सफाई कर्मचारी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिए जाने की भी आवश्यकता है तथा इस वर्ग की शासन एवं सरकार में भागीदारी बनाए जाने की भी अत्यधिक आवश्यकता है क्योंकि आरक्षण के लाभ से यह समाज अभी तक वंचित है साथियों मैंने प्रारंभ में लिखा कि मुझे वाल्मीकि होने पर गर्व है वह इसलिए लिखा कि अपना जीवन अनेकों कठिनाइयों में गुजारने के बावजूद भी पहाड़ जैसी अनेकों समस्याओं के सामने खड़ा होने के बावजूद भी मेरा सफाई कर्मचारी भाई और बहनों राष्ट्रहित में आज अपने जीवन की परवाह किए बिना कोराना वायरस महामारी से लड़ने वाले कर्मवीर योद्धाओं में अग्रणी स्थान पर मजबूती से सक्रिय रूप से कार्यरत हैं मैं ऐसे सभी कर्मवीर राष्ट्रभक्त योद्धाओं को शत शत प्रणाम करता हूं आओ हम सब मिलकर संकल्प लें घर पर रहे हैं सुरक्षित रहे हैं कोरोना को हर आएंगे भारत को जिताएंगे जय भारत जय वाल्मीकि जय भीम ।



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