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Lockdown : “उम्मीद और जागृति का दीया जलाएं, पटाखों का धुआँ ना बढ़ाएँ ”

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“भरी दुपहरी में अँधियारा,

सूरज परछाई से हारा,

अंतरतम का नेह निचोड़े,

बुझी हुई बाती सुलगाएँ आओ फिर से दिया जलाएँ .”

                                                                                                –अटल बिहारी वाजपेयी

मुमकिन है पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ये कविता ऐसे ही किसी भयावह समय में प्रकाश की कामना करते हुए लिखी होगी । बीती रात की कालिमा को रौशन करने जब हज़ार-हज़ार दीप सुलग उठे थे तब भारत के इस अखंड आसमान पर हर भारतीय ने अपने मन में उम्मीद का दीया जलाया था । हर भारतीय आने वाले सुनहरे कल की कामना कर रहा होगा । एकता की मिशाल प्रस्तुत करता ये देश कोरोना जैसी महामारी से जूझते हुए अचानक एक प्रकाश उत्सव में बदल गया था । हर घर में टिमटीमाते दीपकों की कतारें आशा का संदेश पहुंचा रही थी । बारात के नागरिकों ने देश की एकता पर गर्व करने का एक और इतिहास रच दिया । उन्होंने जता दिया कि भारत की संस्कृति कितनी महान है ।

            देश में लॉक डाउन के बीच प्रधानमंत्री के आह्वान पर दिनांक पाँच अप्रेल को रात नौ बजे नौ मिनिट के लिए देशवासियों को अपने-अपने घर की लाइट बंद करके दीपक, मोमबत्ती या टॉर्च जलाकर घर के साथ-साथ पूरे देश को कोरोना के विरूद्ध एकजुटता का संदेश प्रेषित करना था । जिनके पास उपरोक्त साधन नहीं थे उन्हें मोबाइल में उपलब्ध टॉर्च से रौशनी करने का भी एक ऑप्शन खुला था ।

            दिनांक पाँच अप्रेल रात नौ बजे इस देश का हर घर रौशन हुआ और हर धर्म के लोगों ने इस विकट समय को चुनौती देते हुए इस उत्सव में बढ़चढ़ कर भागीदारी की एक पल को देखकर लगा यहाँ सब कुछ अच्छा है किन्तु क्या ऐसा है भी ?कुछ लोगों ने सवाल उठाए कि क्या सिर्फ ताली बजाने से और दीया जलाने से कोरोना सेलड़ा जा सकता है?अभी देश कोविड-19 से निपटने के लिएपर्याप्त चिकित्सियपरीक्षण नहीं कर पा रहा है । लोगों के ताली बजाने और दीया जलाने से समस्या का समाधान होगा ? क्या ऐसे में सरकार को कोरोना के परीक्षण के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध करवाने पर काम नहीं करना चाहिए?क्या इस वक्त जब देश आर्थिक मंडी से जूझ रहा है, लोग अपना रोजगार खो बैठे हैं और दाने-दाने को मोहताज हो रहे हैं ऐसे में क्या ये उपयुक्त नहीं होता कि हर घर में चूल्हा जलाने की व्यवस्था की जाती ?

            जवाब में कई बातें सामने आती हैं, कुछ लोगों का मानना है कि हिंदू धर्म में दीपक जलाने का काफी धार्मिक महत्व है । दीया जलाने की परंपरा हिंदू धर्म में करीब 5000 सालों से भी ज़्यादा पुरानी है । जलता हुआ दीया  अग्नि का प्रतीक माना गया है । पारसी समुदाय में तो अग्नि को देवता मानकर उनकी पूजा होती है । वेद और पुराणों में अग्नि को देवता का रूप माना गया है । यही वजह है कि हिंदू धर्म में किसी भी मांगलिक कार्य में दीया  जलाना अनिवार्य माना जाता है । जलते हुए दीया को अंधकार दूर करने वाले प्रकाश का स्त्रोत माना जाता है । इसे ज्ञान का भी प्रतीक माना जाता है । पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, दीया  जलाने से गरीबी दूर होती है और अज्ञानता का अंधकार मिट जाता है । धर्म शास्त्रों में भी धार्मिक आयोजनों पर दीया  जलाना काफी शुभ माना जाता है । लेकिन क्या ये समय वाक़ई शुभ है इन धार्मिक आयोजनों के लिए ? कुछ लोग मानते हैं कि इस महामारी से निपटने के लिए अध्यात्म से अधिक विज्ञान की शरण में जाना चाहिए । जब इस जंग में देश जीत जाएगा तब धार्मिक आयोजनों के द्वारा उस शक्ति का शुक्रिया अदा किया जाएगा जिसे आस्तिक भगवान और वैज्ञानिक ऊर्जा मानते हैं ।

            बहरहाल इन सवालों से ऊपर हटकर तर्कों पर  बात करें तो स्वास्थ्य मंत्रालय (Ministry of Health) की ओर से जारी किए गए ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक र​विवार को देश में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़कर भारत में कोरोना के मरीज़ 4,067 हो गये हैं ।अब तक 109 की मौत, 24 घंटे में 693 नए मामले सामने आए हैं । परंतु कोविड -19 से जूझने की तैयारियों को लेकर हमारा देश अब भी विश्व के कई छोटे देशों की अपेक्षा बहुत पीछे है । हालांकि सरकार के इस दिशा में उठाए कदम सराहनीय हैं फिर भी देश में इस बीमारी से जागरूकता के प्रति आम जनता अब भी गंभीर नहीं है । मुख्य रूप से इसके बारे में अशिक्षा व जानकारी का अभाव, बेरोज़गारी व लोगों में नागरिक भावना की कमी अहम कारण हैं । इस देश में बहुत से लोग ‘सोशल डिस्टेन्सिंग’ जैसी टर्म से भी पहली बार परिचित हुए होंगे । भविष्य में लोगों में चेतना बढ़ाने  को लेकर मॉक ड्रिल आयोजित की जानी चाहिए ।

            अशिक्षा व अनभिज्ञता रही हो या धार्मिक कारण किन्तु जनता ने दीयों से देश को रौशन करने के संदेश की  अपने -अपने हिसाब से व्याख्या कर ली और सकारात्मक ऊर्जा के बजाय वातावरण को पटाखों के धुएँ से प्रदूषित कर दिया । इस आयोजन से लॉक डाउन के तहत वातावरण मेंआई वायु की शुद्धता का पैमाना हमारी गलतियों की वजह से पुनः दूषित हो गया । साथ ही कार्बनडाई-ऑक्साइड के बढ़े स्तर से वृद्ध, बच्चे व बीमार लोगों की परेशानियाँ कुछ और बढ़ गयी होंगी ।

            अंत में यही कहना चाहूंगी कि अब भी कुछ नहीं बिगड़ा सरकार की कोशिशों के साथ इस देश के नागरिकों को भी अपनी ज़िम्मेदारी को समझना होगा । हम हमेशा अपने अधिकारों की बात करते हैं लेकिन अक्सर भूल जाते हैं कि अधिकारों से पहले हमारे इस देश के प्रति कुछ कर्तव्य भी सुनिश्चित हैं, उन्हें गंभीरता से अमल में लाना होगा । अगर किसी व्यक्ति में कोविड-19 के संक्रमण के लक्षण हैं तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए । बीमारी को छुपाकर आप आपनी जान को तो खतरे में डालते ही हैं साथ ही अपने परिवार और संपर्क में आए हर उस व्यक्ति के लिए भी खतरा उत्पन्न करते हैं  जिन्हें बचाया जा सकता है । स्वास्थ्य कर्मचारी अपना कर्तव्य निभा रहे हैं आप भी अपना फर्ज़ निभाइए । याद रखें ऐसा नहीं करके आप सज़ा के हकदार हैं । इस महामारी से बचने के प्राथमिक उपायों पर गौर करें और अपने साथ-साथ सरकार की मदद करें । कुछ जरूरी सावधानियाँ बरतें –

            “नियमित रूप से समय समय पर साबुन और पानी से जिसमें अल्कोहल मात्र अधिक हो, से 20 सेकंड तक हाथ धोएंऔर हाथों में समय- समय हैंड सैनिटाइज़र लगाते रहें । खांसने और छींकने के दौरान डिस्पोज़ेबल टिशू हाथ में रखें या कोहनी को मोड़कर खाँसे ।अपनी नाक और मुंह को ढकेंजो लोग बीमार हैं उनसे एक मीटर या तीन फ़ीट की दूरी बनाए रखें और अगर आप बीमार हैं, तो खुद को परिवार के सभी लोगों से अलग कर लें और अन्य लोगों से अपने-आपको पृथक कर लें ।”

कोरोना वायरस (COVID-19) को रोकने के लिए, फ़िलहाल किसी तरह का टीका अभी तक अस्तित्व में नहीं आया है, सिर्फ सावधानी और सतर्कता से  ही इस महामारी से सम्पूर्ण मानवता को बचाया जा सकता है । फिलहाल यही नारा दोहराने की आवश्यकता है कि घर में रहें, सुरक्षित रहें । आओ दोहराएँ कि उम्मीद और जागृति का दीया जलाएं, पटाखों का धुआँ ना बढ़ाएँ । 

– रजनी मोरवाल

Email – rajani_morwal@yahoo.com

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