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Lockdown2: इसे खाने से बढ़ती है इम्यूनिटी पावर, बढ़ाती है प्लेटलेट्स की संख्या…. इंदु शर्मा, योग शिक्षिका

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नीम गिलोय या गुडुची, जिसका वैज्ञानिक नाम टीनोस्पोरा कोर्डीफोलिया है, आयुर्वेद में इसका एक महत्वपूर्ण स्थान है। इसके खास गुणों के कारण इसे अमृता भी कहा जाता है। प्राचीन काल से ही इन पत्तियों का उपयोग विभिन्न आयुर्वेदिक दवाइयों में एक खास तत्व के रुप में किया जाता है।
इन दिनों ऋतु परिवर्तन का समय चल रहा है, ऐसे में कई बैक्टिरियाओं का पनपना सामान्य सी बात है जो हमें बीमार बनाने का काम करते हैं। इनसे बचने का सबसे अच्छा तरीका अपनी इम्यूनिटी पावर को बढ़ाना ही है।नीम गिलोय रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है खून साफ करता है व जोड़ों के दर्द के लिए बहुत फायदेमंद है।
गिलोय में अधिक मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी रसायन भी पाया जाता है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है
गिलोय छोटी-बड़ी समस्या के इलाज में भी काम आती है।
डेंगू, स्वाइन फ्लू के निदान में कारगर होने के अलावा शुगर नियंत्रण, सूजन कम करने व पाचन शक्ति बढ़ाने में भी मदद करती है।
गिलोय की पत्तियों और तनों से सत्व निकालकर इस्तेमाल में लाया जाता है। गिलोय को आयुर्वेद में गर्म तासीर का माना जाता है। यह तैलीय होने के साथ साथ स्वाद में कडवा और हल्की झनझनाहट देने वाला होता है। जानकारों के मुताबिक  लंबे समय से चलने वाले बुखार के इलाज में गिलोय काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह शरीर में ब्लड प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाता है जिससे यह डेंगू तथा स्वाइन फ्लू के निदान में बहुत कारगर है। इसके दैनिक इस्तेमाल से मलेरिया से बचा जा सकता है। गिलोय के चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर इस्तेमाल करना चाहिए। 

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