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रमजान के महीने में रोजे के वैज्ञानिक फायदे। जाने डॉ. अबरार

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BBT Times, बीकानेर



डॉ. मो. अबरार पँवार
-इस्लाम के पांच फ़र्ज़ में एक फ़र्ज़ रोजा होता है, हर व्यक्ति रोजे रखने की ख्वाहिश रखता है।
-त्याग और संयम के महीने रमजान मे वैज्ञानिक दृष्टि से रोजे का शरीर पर काफी सकारात्मक प्रभाव पाया गया है।जिसमे शारिरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक रूप से शरीर शुद्ध होता है।
-रोजा रखने से शुगर का स्तर,ब्लड प्रेशर एवँ कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है जिससे डायबिटीज के दुष्प्रभाव, हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक आदि की संभावना कम होती है और हृदय व मस्तिष्क स्वस्थ होता है।
-रोजा (उपवास)शरीर को अशुद्ध व विषैले तत्वों से शुद्ध करता है जिसमे लिवर, किडनी व अन्य ऑर्गन्स भाग लेते हैं, रोजे के दौरान शरीर में जमा अशुद्ध तत्व (जो वसा के रूप में होते हैं) को खत्म कर ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं।
-इससे वजन व अतिरिक्त चर्बी कम होती है जिससे मोटापा घटने लगता है ।
-रोजा रखना एक तरह से तपस्या है जिसमें व्यक्ति भूख, प्यास व बूरी आदतों पर नियंत्रण करता है, व्यक्ति का मन मजबूत होता है जिससे धीरे धीरे व्यसन वाली चीजों को त्यागने की प्रेरणा मिलती हैं
-रोजे में पाचन तंत्र को आराम मिलने से पाचन तंत्र मजबूत होता है,कुछ रिसर्च कहते हैं कि रोजा रखने से गंठिया, जोड़ो का दर्द व चर्म रोग जैसे सोरियासिस को ठीक करने में मदद करता है।
-वही डायबिटीज(शुगर) के रोगियो को सलाह दी जाती है कि जो रोगी सिर्फ इन्सुलिन पर निर्भर नही है यानी टाइप टू  रोगी अपने चिकित्सक की सलाह अनुसार हेल्थी और संतुलित आहार के साथ साथ दवा की मात्रा को एडजस्ट करते हुए रोजा रख सकते हैं,लेकिन अपना ब्लड शुगर नियमित रूप से चेक करते रहना चाहिए ताकि ज्यादा देर भूख,प्यास से शरीर मे शुगर की मात्रा ज्यादा कम ना हो जाये, कइयों को यह भ्रांति रहती है शुगर जांच करने से रोजा टूट सकता है जबकि ऐसा नहीं है।
-शुगर के मरीजों को सुबह सहरी जितना हो सके उतनी देर से करनी चाहिए यानी रोजा शुरू होने से कुछ समय पहले और सहरी में होल व्हीट ब्रेड या रोटी और सब्जियां लेनी चाहिए, मखन, घी या ज्यादा चाय, कॉफी से बचना चाहिए।
-इफ्तार में सिंपल कर्बोहायड्रेट जैसे खजूर,दुध से शुरू करना चाहिए।शिकंजी,नारियल पानी, फल ले सकते हैं लेकिन ज्यादा तली हुई, गरिष्ठ व चिकनाई युक्त चीजो से बचना चाहिए,
-चूँकि एक खजूर में 20 कैलोरी यानी एक चमच शुगर की मात्रा होती है इसलिए दिन में तीन खजूर से ज्यादा नही लेना चाहिए।
-शरीर में पानी की कमी नही हो इसके लिए इफ्तार से सहरी की बीच 8 से 10 कप पानी अवश्य ले।
-रोजे में एक्सरसाइज इफ्तार के दो घंटे बाद कर सकते हैं, रोजे के दौरान ज्यादा शारीरिक श्रम या कसरत से बचना चाहिए वरना हाइपोग्लाइसीमिया जैसी गंभीर परिस्थिति उत्पन हो सकती है।
-वैसे रमजान में इफ्तार के बाद  जो विशेष तरावीह की नमाज होती हैं उसमें भी अच्छी एक्सरसाइज हो जाती है
-दूसरी और हम चिकित्सक कई रोगों में या परस्थितियों में लोगो को रोजा रखने से मना करते हैं जैसे-
1. इन्सुलिन पर निर्भर शुगर के रोगी
 2.किडनी फेलियर के रोगी,
3.हार्ट फेल्योर के रोगी,
4.गर्भवती महिलाएं*
5.डायलिसिस पर जो रोगी हो
-या वे रोगी जो किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित है या उससे हाल ही में उबरे हो उन सबको रोजा रखने की मनाही होती है।
-डॉ. मो. अबरार पँवार(सऊदी अरब में भारतीय हज चिकित्सा मिशन में वर्ष-2001,2002,2003,2006 एवँ 2013 तक चयनित एवँ मिशन के  मेडिकल चीफ कोऑर्डिनेटर  का दायित्व सफलता पूर्वक निभाने पर Consul General of India
(सी जी आई)जेद्दाह द्वारा सम्मानित हुए)
एवँ
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, बीकानेर सिटी ब्रांच के अध्यक्ष

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